चारा की खेती

चारा की खेती (Fodder Cultivation) – 5 दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम

प्रथम दिवस: चारा उत्पादन का परिचय एवं महत्व

प्रशिक्षण के प्रथम दिवस में प्रतिभागियों को पशुपालन में हरे एवं सूखे चारे के महत्व, पशुओं की पोषण आवश्यकताओं तथा चारा उत्पादन की वर्तमान स्थिति के बारे में जानकारी दी जाएगी। चारा फसलों के प्रकार, विभिन्न मौसमों में उगाई जाने वाली चारा फसलें तथा पशुओं के स्वास्थ्य एवं दुग्ध उत्पादन पर उनके प्रभाव की विस्तृत चर्चा की जाएगी। साथ ही भूमि चयन, मृदा परीक्षण तथा खेत की तैयारी की मूलभूत तकनीकों का परिचय कराया जाएगा।

द्वितीय दिवस: चारा फसलों की उन्नत खेती तकनीक

दूसरे दिवस में बरसीम, नेपियर घास, ज्वार, बाजरा, मक्का, लोबिया एवं अन्य प्रमुख चारा फसलों की उन्नत खेती तकनीकों का प्रशिक्षण दिया जाएगा। बीज चयन, बीज उपचार, बुवाई विधि, पौधों की दूरी, उर्वरक प्रबंधन तथा सिंचाई तकनीकों की जानकारी प्रदान की जाएगी। प्रतिभागियों को उच्च उत्पादन प्राप्त करने के लिए वैज्ञानिक खेती पद्धतियों का व्यावहारिक ज्ञान भी दिया जाएगा।

तृतीय दिवस: चारा फसल प्रबंधन एवं संरक्षण

तीसरे दिवस में खरपतवार नियंत्रण, रोग एवं कीट प्रबंधन, पोषक तत्व प्रबंधन तथा चारा फसल की देखभाल से संबंधित तकनीकों का प्रशिक्षण दिया जाएगा। इसके अतिरिक्त चारे की उचित कटाई, भंडारण एवं गुणवत्ता बनाए रखने की विधियों पर विशेष ध्यान दिया जाएगा। खेत भ्रमण के माध्यम से चारा फसल की वृद्धि एवं प्रबंधन का प्रत्यक्ष अवलोकन कराया जाएगा।

चतुर्थ दिवस: साइलेज एवं हे (Hay) निर्माण तकनीक

चौथे दिवस में हरे चारे को लंबे समय तक सुरक्षित रखने हेतु साइलेज एवं हे निर्माण की वैज्ञानिक तकनीकों का प्रशिक्षण दिया जाएगा। साइलेज पिट निर्माण, चारा कटाई, भराई एवं संरक्षण प्रक्रिया की जानकारी दी जाएगी। साथ ही विभिन्न मौसमों में चारे की उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए चारा संरक्षण के व्यावहारिक उपायों का प्रदर्शन किया जाएगा।

पंचम दिवस: चारा आधारित उद्यमिता एवं व्यवसाय प्रबंधन

अंतिम दिवस में चारा उत्पादन को व्यवसाय के रूप में विकसित करने की संभावनाओं, लागत एवं लाभ विश्लेषण, बाजार अवसरों तथा सरकारी योजनाओं की जानकारी प्रदान की जाएगी। प्रतिभागियों को डेयरी एवं पशुपालन इकाइयों के लिए चारा बैंक स्थापना, चारा बिक्री एवं उद्यम विकास के विभिन्न मॉडल समझाए जाएंगे। प्रशिक्षण के समापन पर प्रतिभागियों का मूल्यांकन कर प्रमाण-पत्र वितरित किए जाएंगे तथा भविष्य में स्वरोजगार एवं आय वृद्धि के अवसरों पर मार्गदर्शन प्रदान किया जाएगा।

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