अजोला जैविक

अजोला जैविक उत्पादन एवं उपयोग – 5 दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम

कार्यक्रम का उद्देश्य

ग्रामीण युवाओं, किसानों, पशुपालकों एवं उद्यमियों को अजोला के वैज्ञानिक उत्पादन, प्रबंधन एवं उपयोग की तकनीकों का प्रशिक्षण प्रदान करना, ताकि वे कम लागत में उच्च गुणवत्ता वाला पशु आहार एवं जैविक पोषक स्रोत तैयार कर सकें तथा अतिरिक्त आय के अवसर विकसित कर सकें।

प्रथम दिवस: अजोला का परिचय एवं महत्व

प्रथम दिवस में अजोला की जैविक विशेषताओं, पोषण संरचना एवं कृषि तथा पशुपालन में इसके महत्व पर विस्तृत जानकारी दी जाएगी। प्रतिभागियों को अजोला के विभिन्न प्रकार, जैविक खेती में इसकी भूमिका, नाइट्रोजन स्थिरीकरण क्षमता तथा पशुओं, मुर्गियों, बत्तखों एवं मछलियों के लिए इसके पोषण लाभों से अवगत कराया जाएगा। साथ ही अजोला उत्पादन से होने वाले आर्थिक लाभ एवं रोजगार की संभावनाओं पर चर्चा की जाएगी।

द्वितीय दिवस: अजोला उत्पादन इकाई की स्थापना

दूसरे दिवस में अजोला उत्पादन के लिए उपयुक्त स्थान का चयन, गड्ढा या टैंक निर्माण, पॉलीथीन बिछाने की तकनीक तथा आवश्यक कच्चे माल की व्यवस्था के बारे में प्रशिक्षण दिया जाएगा। प्रतिभागियों को अजोला कल्चर तैयार करने, जल प्रबंधन, पोषक तत्वों की आपूर्ति तथा उत्पादन इकाई की स्थापना का व्यावहारिक प्रदर्शन कराया जाएगा।

तृतीय दिवस: उत्पादन प्रबंधन एवं रखरखाव

तीसरे दिवस में अजोला की दैनिक देखभाल, जल स्तर नियंत्रण, तापमान एवं प्रकाश प्रबंधन, पोषक तत्व पूर्ति तथा रोग एवं कीट नियंत्रण की तकनीकों का प्रशिक्षण दिया जाएगा। प्रतिभागियों को निरंतर एवं गुणवत्तापूर्ण उत्पादन सुनिश्चित करने के लिए आवश्यक सावधानियों तथा उत्पादन वृद्धि के उपायों की जानकारी प्रदान की जाएगी।

चतुर्थ दिवस: अजोला का उपयोग एवं मूल्य संवर्धन

चौथे दिवस में अजोला के पशु आहार, डेयरी, बकरी पालन, मुर्गी पालन, बत्तख पालन एवं मत्स्य पालन में उपयोग की विधियों का प्रशिक्षण दिया जाएगा। इसके अतिरिक्त अजोला आधारित जैविक खाद, कम्पोस्ट एवं अन्य मूल्यवर्धित उत्पादों के निर्माण की जानकारी दी जाएगी। अजोला के उपयोग से पशुओं की उत्पादकता बढ़ाने एवं चारे की लागत कम करने के व्यावहारिक उपायों पर भी चर्चा की जाएगी।

पंचम दिवस: उद्यमिता विकास एवं व्यवसाय प्रबंधन

अंतिम दिवस में अजोला उत्पादन को स्वरोजगार एवं व्यवसाय के रूप में विकसित करने की संभावनाओं, लागत-लाभ विश्लेषण, विपणन रणनीतियों तथा सरकारी योजनाओं की जानकारी प्रदान की जाएगी। प्रतिभागियों को लघु एवं मध्यम स्तर की अजोला उत्पादन इकाइयों की स्थापना, वित्तीय प्रबंधन एवं बाजार से जुड़ाव के विभिन्न मॉडल समझाए जाएंगे। प्रशिक्षण के समापन पर प्रतिभागियों का मूल्यांकन, अनुभव साझा सत्र एवं प्रमाण-पत्र वितरण किया जाएगा।

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