ड्रैगन फ्रूट की खेती

ड्रैगन फ्रूट की खेती

ड्रैगन फ्रूट, हिलोकेरस केक्टेसिया परिवार से संबंधित है। इसे होनोलुलु रानी व पिताया फल के नाम से भी जाना जाता है। यह संतरा, आम, पपीता, केला, सेब आदि की तुलना में अधिक पौष्टिक और फायदेमंद फल है। ड्रैगन फ्रूट बाहर से अनन्नास की भांति दिखाई देता है, लेकिन अन्दर से गूदा सफेद और काले छोटे-छोटे बीजों से भरा हुआ नाशपाती या कीवी की तरह होता है। इस आकर्षक एवं रहस्यमय फल का रंग लाल-गुलाबी होता है। इसकी त्वचा में हरे रंग की पंक्तियां होती हैं, जो ड्रैगन की तरह दिखाई देती हैं इसलिए इसको ड्रैगन फ्रूट के नाम से भी जाना जाता है।

ड्रैगन फ्रूट (पिताया) एक कैक्टस वर्ग का फल है, जिसकी मांग भारत में तेजी से बढ़ रही है। यह कम पानी में भी अच्छी पैदावार देता है और एक बार बाग लगाने पर 15–20 वर्षों तक उत्पादन मिल सकता है।

जलवायु और मिट्टी का चयन

ड्रैगन फ्रूट गर्म और शुष्क जलवायु में अच्छी तरह बढ़ता है। 20°C से 35°C तापमान इसके लिए उपयुक्त माना जाता है। अत्यधिक पाला और जलभराव इसके पौधों को नुकसान पहुंचा सकते हैं। अच्छी जल निकासी वाली बलुई दोमट या दोमट मिट्टी सबसे अच्छी रहती है। मिट्टी का pH 5.5 से 7.5 के बीच होना चाहिए।

खेत की तैयारी

खेत की गहरी जुताई करके खरपतवार साफ करें। ड्रैगन फ्रूट बेलनुमा पौधा है, इसलिए इसे सहारे की आवश्यकता होती है। खेत में लगभग 2–2.5 मीटर की दूरी पर सीमेंट या कंक्रीट के खंभे लगाएं। खंभों की ऊंचाई जमीन से लगभग 5–6 फीट रखी जाती है। ऊपर गोल रिंग या टायर लगाकर पौधों को फैलने का सहारा दिया जाता है।

पौधों का चयन और रोपण

अच्छी नर्सरी से स्वस्थ कटिंग या पौधे खरीदें। आमतौर पर 40–50 सेंटीमीटर लंबी कटिंग लगाई जाती है। प्रत्येक खंभे के चारों ओर 4 पौधे लगाए जाते हैं। रोपण का सबसे अच्छा समय फरवरी–मार्च या जून–जुलाई माना जाता है। पौधा लगाने के बाद हल्की सिंचाई करें।

सिंचाई प्रबंधन

ड्रैगन फ्रूट को अधिक पानी की आवश्यकता नहीं होती। ड्रिप सिंचाई सबसे उपयुक्त रहती है। गर्मियों में 5–7 दिन के अंतराल पर और सर्दियों में 10–15 दिन के अंतराल पर सिंचाई की जा सकती है। बरसात में जलभराव बिल्कुल न होने दें, क्योंकि इससे जड़ सड़न की समस्या हो सकती है।

खाद और उर्वरक

रोपण के समय प्रति गड्ढे में 10–15 किलोग्राम गोबर की सड़ी खाद डालें। पौधों की वृद्धि के साथ जैविक खाद, वर्मी कम्पोस्ट और संतुलित NPK उर्वरकों का प्रयोग किया जा सकता है। फूल और फल बनने के समय पोटाश की मात्रा बढ़ाने से उत्पादन और गुणवत्ता में सुधार होता है।

पौधों की ट्रेनिंग और छंटाई

जब पौधा बढ़कर खंभे की ऊंचाई तक पहुंच जाए, तो मुख्य तने को ऊपर की ओर बांध दें। ऊपर पहुंचने के बाद शाखाओं को चारों ओर फैलने दें। समय-समय पर सूखी, कमजोर और रोगग्रस्त शाखाओं की छंटाई करें। इससे पौधे में प्रकाश और हवा का संचार अच्छा रहता है।

फूल और फल लगना

रोपण के लगभग 12–18 महीने बाद पौधे फूल देना शुरू कर सकते हैं। ड्रैगन फ्रूट के फूल रात में खिलते हैं और बहुत बड़े तथा सुगंधित होते हैं। फूल आने के लगभग 30–40 दिन बाद फल तैयार हो जाते हैं।

तुड़ाई और विपणन

जब फल का रंग पूरी तरह गुलाबी या लाल हो जाए, तब उसकी तुड़ाई करें। कच्चे फल न तोड़ें। ताजे फल स्थानीय बाजार, सुपरमार्केट और फल मंडियों में अच्छे दाम पर बिकते हैं।

लागत और कमाई

  • 1 एकड़ में लगभग 1,600–1,800 पौधे लगाए जा सकते हैं।

  • शुरुआती लागत (खंभे, पौधे, ड्रिप सिस्टम आदि सहित) अपेक्षाकृत अधिक होती है।

  • दूसरे वर्ष से उत्पादन शुरू हो जाता है।

  • अच्छी देखभाल के साथ एक एकड़ से कई टन उत्पादन प्राप्त किया जा सकता है।

  • बाजार भाव के अनुसार ड्रैगन फ्रूट की खेती काफी लाभदायक सिद्ध हो सकती है।

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