🌱 परिचय (Introduction)
ब्रोकली गोभी (Cabbage) की एक विदेशी किस्म है जो ब्रासिका (Brassica oleracea var. italica) प्रजाति से संबंधित है।
इसका उपयोग सब्जी, सलाद, सूप और औषधीय उत्पादों में होता है।
यह विटामिन C, विटामिन K, कैल्शियम, आयरन, प्रोटीन और एंटीऑक्सीडेंट्स का समृद्ध स्रोत है।
भारत में इसकी खेती मुख्य रूप से हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड, जम्मू-कश्मीर, हरियाणा, पंजाब और उत्तर प्रदेश में की जाती है।
जलवायु (Climate)
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ब्रोकली एक शीतकालीन (Cool Season) फसल है।
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तापमान 15°C से 25°C तक इसके लिए उपयुक्त होता है।
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30°C से अधिक तापमान पर फूल (हेड) का विकास रुक जाता है।
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हल्की ठंड में इसका स्वाद बेहतर होता है।
भूमि (Soil)
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अच्छी जल निकासी वाली दोमट या बलुई दोमट मिट्टी सबसे उपयुक्त होती है।
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मिट्टी का pH मान 6.0 से 7.0 होना चाहिए।
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भूमि में पर्याप्त जैविक पदार्थ (Organic Matter) होना जरूरी है।
प्रमुख किस्में (Varieties)
किस्म |
विशेषताएँ |
|---|---|
Pusa Broccoli KTS-1 |
भारतीय जलवायु के लिए उपयुक्त, हरी व मजबूत हेड |
Palam Samridhi |
जल्दी तैयार होने वाली किस्म |
Green Magic |
अधिक उत्पादन देने वाली हाइब्रिड |
Lucky |
उच्च गुणवत्ता और समान आकार की हेड |
Fiesta |
ठंडे क्षेत्रों के लिए उपयुक्त |
Solan Green Head |
70–80 दिन में तैयार, बाजार में अच्छी मांग |
बीज की मात्रा और नर्सरी तैयार करना
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बीज दर: 250–300 ग्राम प्रति हेक्टेयर
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नर्सरी के लिए 1 वर्ग मीटर में लगभग 3–4 ग्राम बीज बोएं।
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बीज को फफूंदनाशक (Captan या Trichoderma) से उपचारित करें।
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बीज बोने के बाद हल्की सिंचाई करें और छाया दें।
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25–30 दिन के पौधे खेत में प्रतिरोपण के लिए तैयार हो जाते हैं।
खेत की तैयारी और रोपाई
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खेत की 2–3 बार जुताई कर के मिट्टी को भुरभुरी बना लें।
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प्रति हेक्टेयर 20–25 टन गोबर की सड़ी हुई खाद डालें।
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पौधों की दूरी:
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पंक्ति से पंक्ति: 45–60 सेमी
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पौधे से पौधे: 30–45 सेमी
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टपक (Drip) सिंचाई से बेहतर परिणाम मिलते हैं।
सिंचाई (Irrigation)
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पहली सिंचाई रोपाई के तुरंत बाद करें।
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बाद में 7–10 दिन के अंतराल पर हल्की सिंचाई करें।
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मिट्टी में नमी बनी रहे, परंतु जलभराव न हो।
खाद एवं उर्वरक (Fertilizer Management)
ब्रोकली की फसल को संतुलित पोषण की आवश्यकता होती है।
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गोबर की खाद: 20–25 टन/हेक्टेयर
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नाइट्रोजन (N): 125–150 किग्रा/हेक्टेयर
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फास्फोरस (P): 60–80 किग्रा/हेक्टेयर
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पोटाश (K): 40–60 किग्रा/हेक्टेयर
नाइट्रोजन को 3 भागों में बाँटकर दें –
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एक भाग रोपाई के समय,
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दूसरा भाग 30 दिन बाद,
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तीसरा भाग फूल आने से पहले।
रोग एवं कीट नियंत्रण (Pest & Disease Management)
मुख्य रोग:
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ब्लैक रॉट: पत्तियों की नसें काली होकर सूख जाती हैं।
नियंत्रण: बीजोपचार करें और रोगग्रस्त पौधों को हटा दें। -
डाउन माइल्ड्यू: पत्तियों के नीचे सफेद फफूंदी।
नियंत्रण: मैन्कोज़ेब (Mancozeb 0.25%) का छिड़काव करें। -
डैम्पिंग ऑफ: पौध गलन।
नियंत्रण: ट्राइकोडर्मा से बीज उपचार करें।
प्रमुख कीट:
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कैबेज बटरफ्लाई (Cabbage Butterfly): पत्तियों को खाती है।
नियंत्रण: नीम तेल (5%) का छिड़काव।
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एफिड्स (Aphids): रस चूसने वाले कीट।
नियंत्रण: कीटनाशक इमिडाक्लोप्रिड 0.3 मिली/लीटर पानी।
फूल (हेड) की तुड़ाई (Harvesting)
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रोपाई के 60–80 दिन बाद हेड तैयार हो जाती है।
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हेड सख्त, हरी और कॉम्पैक्ट होनी चाहिए।
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देर करने पर फूल ढीले पड़ जाते हैं, जिससे बाजार मूल्य घटता है।
उपज (Yield)
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सामान्य किस्में: 100–150 क्विंटल प्रति हेक्टेयर
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हाइब्रिड किस्में: 150–200 क्विंटल प्रति हेक्टेयर तक
लागत व लाभ (Cost & Profit Analysis)
विवरण |
अनुमानित राशि (₹/हेक्टेयर) |
|---|---|
बीज, खाद, कीटनाशक |
₹25,000–30,000 |
मजदूरी व सिंचाई |
₹20,000–25,000 |
कुल लागत |
₹45,000–55,000 |
औसत उत्पादन |
120–150 क्विंटल |
बिक्री दर (₹40–50/kg) |
₹4,80,000–7,50,000 |
शुद्ध लाभ |
₹4,00,000–6,00,000 प्रति हेक्टेयर |
