शलजम की खेती की पूरी जानकारी
शलजम (Turnip) की खेती एक आसान और लाभदायक खेती है, खासकर ठंडे मौसम में। यह जड़ वाली सब्जी होती है और जल्दी तैयार हो जाती है।
1. जलवायु (Climate)
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शलजम समशीतोष्ण जलवायु (Cool climate) में अच्छा उगता है।
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तापमान: 10°C से 25°C के बीच सर्वोत्तम रहता है।
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गर्मी या बहुत ठंड दोनों ही फसलों को नुकसान पहुंचाते हैं।
2. मिट्टी (Soil)
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दोमट या बलुई दोमट मिट्टी शलजम के लिए सबसे अच्छी होती है।
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pH: 6.0 से 7.5 के बीच होना चाहिए।
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भूमि सुखी और जल निकास वाली होनी चाहिए ताकि जड़ सड़ने की समस्या न हो।
3. खेत की तैयारी
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खेत को 2–3 बार हल या रोटावेटर से अच्छी तरह जोतें।
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अंतिम जुताई के समय:
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15–20 टन गोबर की खाद (FYM) प्रति हेक्टेयर डालें।
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क्यारियाँ (beds) बनाएं ताकि सिंचाई और जल निकासी सही हो।
4. बीज की बुवाई (Sowing)
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समय:
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उत्तर भारत में – अक्टूबर से दिसंबर
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पहाड़ी क्षेत्रों में – फरवरी से अप्रैल
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बीज की मात्रा:
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प्रति हेक्टेयर लगभग 2–3 किलोग्राम बीज पर्याप्त होता है।
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बुवाई की विधि:
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लाइन टू लाइन दूरी: 30 सें.मी.
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पौधों की दूरी: 10–15 सें.मी.
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बीज को हल्की मिट्टी से ढकें और हल्की सिंचाई करें।
5. सिंचाई (Irrigation)
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पहली सिंचाई बुवाई के तुरंत बाद करें।
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इसके बाद 7–10 दिन के अंतर पर सिंचाई करें।
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मिट्टी में नमी बनी रहनी चाहिए, पर जलभराव न हो।
6. खरपतवार नियंत्रण (Weed Control)
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पहली निराई 15–20 दिन बाद करें।
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जरूरत अनुसार 2–3 बार निराई करें।
7. खाद एवं उर्वरक (Fertilizer)
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प्रति हेक्टेयर:
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N (नाइट्रोजन): 60 किग्रा
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P₂O₅ (फॉस्फोरस): 40 किग्रा
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K₂O (पोटाश): 40 किग्रा
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आधा नाइट्रोजन और पूरा P-K बुवाई के समय,
बाकी आधा नाइट्रोजन पहली सिंचाई के बाद दें।
8. रोग व कीट नियंत्रण
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एफिड्स (aphids) – रोग लगने पर नीम का घोल या इमिडाक्लोप्रिड स्प्रे करें।
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डाउनी मिल्ड्यू / लीफ स्पॉट – मैन्कोज़ेब या कॉपर ऑक्सीक्लोराइड छिड़काव करें।
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रोग मुक्त और प्रमाणित बीज ही प्रयोग करें।
9. फसल की कटाई (Harvesting)
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बुवाई के 40–60 दिन बाद फसल तैयार हो जाती है।
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जब जड़ें गोल और मुलायम हों, तभी तोड़ें।
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अधिक देर करने पर जड़ें सख्त और रेशेदार हो जाती हैं।
10. उत्पादन व लाभ
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औसत उत्पादन: 200–250 क्विंटल प्रति हेक्टेयर।
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लागत: लगभग ₹25,000–₹30,000 प्रति हेक्टेयर।
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शुद्ध लाभ: ₹50,000–₹70,000 प्रति हेक्टेयर तक मिल सकता है।
