अनार की खेती

अनार की खेती की संपूर्ण जानकारी 

जलवायु (Climate)

अनार एक उपोष्णकटिबंधीय फल फसल है। इसकी खेती गर्म और शुष्क जलवायु में सबसे अच्छी होती है। फल बनने और पकने के समय सूखा मौसम फलों की गुणवत्ता बढ़ाता है। अनार की खेती के लिए 15°C से 40°C तापमान उपयुक्त माना जाता है। अधिक आर्द्रता (नमी) होने पर फलों के फटने तथा फफूंद जनित रोगों का खतरा बढ़ जाता है।

मिट्टी का चयन (Soil Selection)

अनार की खेती लगभग सभी प्रकार की मिट्टी में की जा सकती है, लेकिन अच्छी जल निकासी वाली रेतीली दोमट मिट्टी सबसे उपयुक्त रहती है। मिट्टी का pH मान 6.5 से 7.5 के बीच होना चाहिए। जलभराव वाली भूमि में खेती नहीं करनी चाहिए क्योंकि इससे जड़ों में सड़न की समस्या हो सकती है।

खेत की तैयारी (Field Preparation)

खेत की 2–3 बार अच्छी जुताई करें और खरपतवारों को पूरी तरह नष्ट करें। खेत को समतल बनाकर उचित जल निकासी की व्यवस्था करें। पौधों की रोपाई से पहले 60 × 60 × 60 सेंटीमीटर आकार के गड्ढे तैयार करें। प्रत्येक गड्ढे में 20 किलोग्राम सड़ी हुई गोबर की खाद तथा 1 किलोग्राम सिंगल सुपर फॉस्फेट मिलाकर भरें।

पौधों का चयन (Selection of Plants)

हमेशा प्रमाणित नर्सरी से स्वस्थ और रोगमुक्त पौधे खरीदें। अनार की खेती कलम (Cutting), एयर लेयरिंग और ग्राफ्टिंग द्वारा तैयार पौधों से की जाती है। अच्छी गुणवत्ता वाले पौधे भविष्य में अधिक उत्पादन देते हैं।

रोपाई का समय (Planting Time)

अनार के पौधे लगाने का सबसे अच्छा समय जुलाई से सितंबर तक माना जाता है क्योंकि इस समय मिट्टी में पर्याप्त नमी रहती है। सिंचित क्षेत्रों में फरवरी से मार्च के दौरान भी पौधों की रोपाई की जा सकती है।

पौधों की रोपाई (Planting Method)

अनार के पौधों को कतारों में लगाया जाता है। पौधे से पौधे तथा कतार से कतार की दूरी लगभग 5 मीटर रखनी चाहिए। इस प्रकार एक हेक्टेयर में लगभग 400 पौधे लगाए जा सकते हैं। रोपाई के बाद पौधों के आसपास मिट्टी को हल्के हाथ से दबाकर तुरंत सिंचाई करें।

सिंचाई प्रबंधन (Irrigation Management)

अनार के पौधे सूखा सहन कर लेते हैं, लेकिन उच्च गुणवत्ता वाले फल प्राप्त करने के लिए नियमित सिंचाई आवश्यक है। रोपाई के तुरंत बाद हल्की सिंचाई करें। गर्मियों में 5–7 दिन के अंतराल पर तथा सर्दियों में 12–15 दिन के अंतराल पर सिंचाई करें। ड्रिप सिंचाई सबसे उपयुक्त विधि है क्योंकि इससे पानी की बचत होती है और पौधों की जड़ों तक सीधे नमी पहुंचती है।

खाद एवं उर्वरक प्रबंधन (Nutrient Management)

अच्छी उपज के लिए पौधों को संतुलित पोषण देना आवश्यक है।

प्रति पौधा खाद की मात्रा (वयस्क पौधों के लिए)

  • गोबर की सड़ी खाद: 20–25 किलोग्राम

  • नाइट्रोजन (N): 500–600 ग्राम

  • फॉस्फोरस (P): 250–300 ग्राम

  • पोटाश (K): 250–300 ग्राम

उर्वरकों को 2–3 भागों में विभाजित करके देना अधिक लाभदायक रहता है।

खरपतवार नियंत्रण (Weed Management)

खरपतवार पौधों से पोषक तत्व और नमी छीन लेते हैं। इसलिए समय-समय पर निराई-गुड़ाई करना आवश्यक है। पौधों के चारों ओर पुआल, सूखी घास या पत्तियों से मल्चिंग करने से खरपतवार कम उगते हैं और मिट्टी की नमी बनी रहती है।

पौधों की कटाई-छंटाई (Pruning)

अनार के पौधों की नियमित छंटाई बहुत महत्वपूर्ण है। सूखी, रोगग्रस्त तथा कमजोर शाखाओं को समय-समय पर हटाते रहें। इससे पौधों में नई वृद्धि होती है और उत्पादन बढ़ता है।

प्रमुख रोग एवं कीट (Major Diseases and Pests)

रोग

  • बैक्टीरियल ब्लाइट

  • एन्थ्रेक्नोज

  • फल सड़न रोग

  • चूर्णिल आसिता (Powdery Mildew)

  • कैंकर रोग

कीट

  • फल मक्खी

  • थ्रिप्स

  • मिलीबग

  • एफिड

  • नेमाटोड

रोग एवं कीट नियंत्रण के लिए नियमित निरीक्षण करें। समस्या दिखाई देने पर कृषि विशेषज्ञ की सलाह अनुसार उचित दवा का प्रयोग करें।

फलों के फटने की समस्या

अनार में फलों के फटने की समस्या सामान्य है। इसका मुख्य कारण अनियमित सिंचाई, पोषक तत्वों की कमी तथा अधिक नमी है। नियमित सिंचाई और संतुलित उर्वरक प्रबंधन से इस समस्या को कम किया जा सकता है।

फल लगना एवं तुड़ाई (Harvesting)

अनार के पौधे सामान्यतः 2–3 वर्ष बाद फल देना शुरू कर देते हैं। फल आने के लगभग 120–130 दिन बाद तुड़ाई के लिए तैयार हो जाते हैं। जब फल अपनी किस्म के अनुसार गहरा रंग प्राप्त कर लें और पूरी तरह विकसित हो जाएं, तब उनकी तुड़ाई करनी चाहिए। फलों को डंठल सहित तेज धार वाले चाकू या कैंची से काटना चाहिए।

उत्पादन (Yield)

  • एक स्वस्थ पौधा 50–100 किलोग्राम तक फल दे सकता है।

  • अच्छी देखभाल होने पर 1 हेक्टेयर से 15–25 टन तक उत्पादन प्राप्त किया जा सकता है।

लागत और कमाई (Cost & Profit)

अनार एक दीर्घकालिक और लाभदायक बागवानी फसल है। एक बार बाग लगाने के बाद लगभग 15–20 वर्षों तक उत्पादन मिलता है। अच्छी किस्म, उचित प्रबंधन और अच्छे बाजार भाव मिलने पर किसान प्रति हेक्टेयर लाखों रुपये का शुद्ध लाभ कमा सकते हैं।

अनार की प्रमुख उन्नत किस्में

  • भगवा (Bhagwa)

  • गणेश (Ganesh)

  • मृदुला (Mridula)

  • अरक्ता (Arakta)

  • ज्योति (Jyoti)

  • रुबी (Ruby)

महत्वपूर्ण सुझाव

  • केवल प्रमाणित नर्सरी से पौधे खरीदें।

  • ड्रिप सिंचाई अपनाएं।

  • नियमित छंटाई करें।

  • मिट्टी परीक्षण करवाकर ही उर्वरकों का प्रयोग करें।

  • रोग एवं कीटों की निगरानी लगातार करते रहें।

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