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FAQ
🍅 टमाटर की वैज्ञानिक खेती से जुड़े अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)
1. टमाटर क्या है और इसका महत्व क्या है?
उत्तर:
टमाटर एक प्रमुख सब्ज़ी फसल है जिसमें पौष्टिक तत्व जैसे कार्बोहाइड्रेट, प्रोटीन, खनिज पदार्थ, कैल्शियम, फास्फोरस और विटामिन प्रचुर मात्रा में पाए जाते हैं। यह आलू के बाद दुनिया में सबसे अधिक उत्पादित सब्जी है।
2. टमाटर का उपयोग कहाँ-कहाँ होता है?
उत्तर:
टमाटर का उपयोग सूप, सलाद, चटनी, सॉस, सब्ज़ियों में स्वाद बढ़ाने के लिए और औद्योगिक उत्पादों में किया जाता है।
3. टमाटर की खेती के लिए उपयुक्त जलवायु कौन-सी है?
उत्तर:
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औसत तापमान: 18°C से 27°C सबसे उपयुक्त है।
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10°C से कम या 40°C से अधिक तापमान पर फल में लाल रंग बनना बंद हो जाता है।
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पाला और अत्यधिक गर्म हवाएँ (लू) टमाटर के फूल और फल को नुकसान पहुंचाती हैं।
4. टमाटर की खेती के लिए कौन-सी मिट्टी उपयुक्त है?
उत्तर:
टमाटर लगभग सभी प्रकार की मिट्टियों में उगाया जा सकता है, लेकिन दोमट या हल्की अम्लीय मिट्टी जिसमें जैविक पदार्थ अधिक हो और जल निकासी अच्छी हो, सर्वोत्तम मानी जाती है।
5. टमाटर की प्रमुख किस्में कौन-कौन सी हैं?
उत्तर:
देशी किस्में: पूसा रूबी, पूसा गौरव, एव.एस.-102, हिसार अरुण, हिसार लालिमा, हिसार ललित, पंजाब छुहारा, पंजाब केसरी, एन.डी.टी.-3, एन.डी.टी.-11, स्वीट-72, पूसा सदाबहार, पंत बहार।
संकर (हाइब्रिड) किस्में: वैशालनी, रुपाली, नवीन, रजनी, अविनाश-2, अर्का विशाल, कंचन, पूसा संकर-1, पूसा संकर-2, पूसा संकर-4।
6. टमाटर के पौधे कैसे तैयार करें?
उत्तर:
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प्रति हेक्टेयर 400–500 ग्राम (संकर के लिए 200 ग्राम) बीज की आवश्यकता होती है।
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बीज को एग्रोसन जी.एन. (2 ग्राम/किग्रा बीज) से उपचारित करें।
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नर्सरी की मिट्टी में पानी की निकासी होनी चाहिए।
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अंकुरण के बाद 0.2% डाइथेन एम-45 का छिड़काव फफूंद रोगों से बचाता है।
7. खेत की तैयारी कैसे करें?
उत्तर:
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खेत को 3–4 बार जुताई कर समतल करें।
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सड़ी गोबर की खाद 250–300 क्विंटल/हेक्टेयर की दर से डालें।
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उर्वरक मात्रा (मिट्टी परीक्षण न होने पर):
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नाइट्रोजन: 100 किग्रा/हे.
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फास्फोरस: 80 किग्रा/हे.
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पोटाश: 60 किग्रा/हे.
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एक-तिहाई नाइट्रोजन और पूरा फास्फोरस-पोटाश रोपाई से पहले मिट्टी में मिलाएँ।
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बाकी नाइट्रोजन दो बार — 30 और 50 दिन बाद दें।
8. पौधों की दूरी कितनी रखनी चाहिए?
उत्तर:
औसतन 60 × 45 सेमी दूरी पर पौधों की रोपाई लाभदायक होती है।
अधिक उपजाऊ मिट्टी में दो पौधे एक साथ लगाए जा सकते हैं।
9. सिंचाई कब और कैसे करनी चाहिए?
उत्तर:
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पहली सिंचाई प्रतिरोपण के तुरंत बाद करें।
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सामान्यतः हर 15–20 दिन पर सिंचाई करें।
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सर्दी में पाले और गर्मी में लू से बचाव हेतु हर 10–12 दिन पर सिंचाई करें।
10. खरपतवार नियंत्रण कैसे करें?
उत्तर:
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रोपाई के 35–40 दिन बाद निराई-गुड़ाई करें।
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रासायनिक नियंत्रण के लिए:
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लासो (2 किग्रा/हे.) – रोपण से पहले प्रयोग करें।
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स्टाम्प (1.0 किग्रा/हे.) – रोपण के 4–5 दिन बाद डालें।
11. वृद्धि नियंत्रक (Plant Growth Regulators) का प्रयोग कब करें?
उत्तर:
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50–100 पी.पी.एम. घोल का फूलों के गुच्छों पर छिड़काव करें ताकि अधिक तापमान में भी फल बन सकें।
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500 पी.पी.एम. साइकोसेल का छिड़काव पौधशाला में प्रतिरोपण से 3–4 दिन पहले करें।
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1000 पी.पी.एम. इथ्रेल का छिड़काव फल पकाने के लिए उपयोगी है।
12. टमाटर के प्रमुख कीट कौन-कौन से हैं और नियंत्रण कैसे करें?
उत्तर:
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फल छेदक कीट: फल में छेद करके अंदर से खाता है।
→ संक्रमित फल नष्ट करें और 0.05% रोगोर या मेटासिस्टॉक्स का छिड़काव करें।
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जैसिड: पौधों का रस चूसता है।
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सफेद मक्खी: पत्तियों का रस चूसकर “मोज़ेक” रोग फैलाती है।
→ एक पखवाड़े बाद पुनः छिड़काव करें।
13. प्रमुख बीमारियाँ और उनके नियंत्रण के तरीके क्या हैं?
उत्तर:
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डैम्पिंग ऑफ (पौध गलन): बीजोपचार कैप्टाफ या थीरम (2 ग्राम/किग्रा बीज)।
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अगेती झुलसा रोग: पत्तियों व फलों पर भूरे धब्बे।
→ 0.2% डाइथेन एम-45 का 10–15 दिन के अंतराल पर छिड़काव करें।
14. टमाटर की औसत उपज कितनी होती है?
उत्तर:
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उन्नत किस्में: 300–400 क्विंटल/हेक्टेयर
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संकर किस्में: 500–600 क्विंटल/हेक्टेयर
15. टमाटर के बीज उत्पादन की विधि क्या है?
उत्तर:
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दो किस्मों के बीच 25–50 मीटर दूरी रखें।
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शुद्ध बीज पूर्ण रूप से पके फलों से प्राप्त करें।
मुख्य विधियाँ:
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फलों के गूदे को 2–3 दिन पानी में रखकर, फिर बीज धोकर छाया में सुखाएँ।
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100 मिली. हाइड्रोक्लोरिक अम्ल को 10 किलो गूदे में 30 मिनट रखें, फिर धोकर सुखाएँ।
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प्रति हेक्टेयर 100–125 किग्रा बीज प्राप्त होता है।
16. टमाटर की बेहतर उपज के लिए क्या विशेष सुझाव हैं?
उत्तर:
पौध गलन व झुलसा से बचाव हेतु बीजोपचार करें।
समय पर निराई-गुड़ाई और संतुलित उर्वरक दें।
उचित तापमान पर सिंचाई करें।
जैविक खाद और रोग-कीट नियंत्रण हेतु एकीकृत पद्धति (IPM) अपनाएँ।
संकर किस्मों का चयन कर वैज्ञानिक विधि से खेती करें।
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