बेर की खेती कैसे करें? (विस्तार से)
बेर एक अत्यंत लाभदायक फलदार फसल है। यह कम पानी, गर्म मौसम और अपेक्षाकृत खराब मिट्टी में भी अच्छी पैदावार देती है। बिहार सहित उत्तर भारत के अधिकांश क्षेत्रों में इसकी खेती सफलतापूर्वक की जा सकती है। बेर के फल विटामिन C, कैल्शियम और आयरन से भरपूर होते हैं, इसलिए बाजार में इसकी अच्छी मांग रहती है।
जलवायु और मिट्टी का चयन
बेर की खेती के लिए गर्म और शुष्क जलवायु सबसे उपयुक्त होती है। 20°C से 35°C तापमान इसके लिए अच्छा माना जाता है। यह सूखा सहन कर सकता है, लेकिन अधिक जलभराव पौधों को नुकसान पहुंचाता है। दोमट, बलुई दोमट तथा हल्की क्षारीय मिट्टी में भी इसकी खेती की जा सकती है। मिट्टी का pH 6.5 से 8.5 तक उपयुक्त रहता है।
उन्नत किस्मों का चयन
व्यावसायिक खेती के लिए उन्नत किस्में लगाना लाभदायक रहता है। भारत में उमरान, गोला, सेब बेर और काठा जैसी किस्में लोकप्रिय हैं। ग्राफ्टेड पौधे लगाने से जल्दी फल प्राप्त होते हैं और उत्पादन अधिक मिलता है।
खेत की तैयारी
खेत की अच्छी तरह जुताई कर खरपतवार साफ कर दें। इसके बाद 1 मीटर × 1 मीटर × 1 मीटर आकार के गड्ढे खोदें। प्रत्येक गड्ढे में 20–25 किलोग्राम सड़ी गोबर की खाद, 1–2 किलोग्राम नीम खली और ऊपरी मिट्टी मिलाकर भर दें। गड्ढों को रोपण से 15–20 दिन पहले तैयार कर लेना चाहिए।
पौध रोपण
बेर के पौधों की रोपाई जुलाई से अगस्त के बीच वर्षा ऋतु में करना सबसे अच्छा माना जाता है। पौधों के बीच 6–8 मीटर की दूरी रखें। पौधा लगाने के बाद मिट्टी अच्छी तरह दबा दें और तुरंत सिंचाई करें। यदि तेज हवा चलती हो तो पौधे को सहारा दें।
सिंचाई प्रबंधन
रोपण के बाद पहले वर्ष नियमित सिंचाई आवश्यक होती है। गर्मियों में 7–10 दिन के अंतराल पर पानी दें। फल बनने के समय पर्याप्त नमी बनाए रखने से फल का आकार और गुणवत्ता बेहतर होती है। बरसात में जलभराव न होने दें।
खाद और उर्वरक
हर वर्ष प्रति पौधा 20–30 किलोग्राम गोबर की खाद डालें। पौधे की उम्र बढ़ने के साथ खाद की मात्रा भी बढ़ाई जा सकती है। संतुलित नाइट्रोजन, फॉस्फोरस और पोटाश देने से पौधों की वृद्धि और उत्पादन में सुधार होता है।
छंटाई (Pruning)
बेर की खेती में छंटाई बहुत महत्वपूर्ण होती है। हर वर्ष फल तुड़ाई के बाद पुरानी, सूखी और कमजोर शाखाओं को काट दें। नई शाखाओं पर ही अधिक फल आते हैं, इसलिए सही छंटाई से उत्पादन काफी बढ़ जाता है।
रोग और कीट नियंत्रण
फल मक्खी, पत्ती खाने वाले कीट और पाउडरी मिल्ड्यू जैसी समस्याएं कभी-कभी दिखाई दे सकती हैं। बाग की नियमित निगरानी करें और आवश्यकता पड़ने पर कृषि विशेषज्ञ की सलाह अनुसार उपचार करें। साफ-सफाई बनाए रखने से रोगों का प्रकोप कम होता है।
फल तुड़ाई
ग्राफ्टेड पौधे सामान्यतः 2–3 वर्ष में फल देना शुरू कर देते हैं। फल पकने पर हरे रंग से पीले, लाल या भूरे रंग के हो जाते हैं (किस्म के अनुसार)। फल पूरी तरह पकने पर ही तुड़ाई करें ताकि बाजार में अच्छा मूल्य मिले।
उत्पादन और कमाई
एक विकसित बेर का पेड़ प्रति वर्ष लगभग 50–150 किलोग्राम या उससे अधिक फल दे सकता है। अच्छी देखभाल और उन्नत किस्मों के साथ एक एकड़ से अच्छा उत्पादन प्राप्त किया जा सकता है। ताजे फल, सूखे बेर और प्रसंस्कृत उत्पादों की मांग होने के कारण इसकी खेती लाभदायक मानी जाती है।