बेल की खेती

बेल (बेलपत्र) की खेती कैसे करें – विस्तार से

बेल (Bael) एक औषधीय और फलदार वृक्ष है, जिसका वैज्ञानिक नाम Aegle marmelos है। इसके फल, पत्ते और जड़ें आयुर्वेद में उपयोग की जाती हैं। बेल की खेती कम पानी वाले क्षेत्रों में भी सफलतापूर्वक की जा सकती है और एक बार लगाने के बाद पेड़ 40–50 वर्ष या उससे अधिक समय तक उत्पादन देता है।

जलवायु और मिट्टी का चयन

बेल का पौधा गर्म और शुष्क जलवायु में अच्छी तरह बढ़ता है। यह 20°C से 40°C तक का तापमान सहन कर सकता है। इसकी सबसे बड़ी विशेषता यह है कि यह सूखे को भी सहन कर लेता है। दोमट, बलुई दोमट और हल्की क्षारीय मिट्टी में भी इसकी खेती की जा सकती है, बशर्ते पानी का जमाव न हो।

पौधों का चयन

व्यावसायिक खेती के लिए कलम या ग्राफ्टेड पौधे लगाना बेहतर होता है, क्योंकि ये जल्दी फल देना शुरू करते हैं और फल की गुणवत्ता भी अच्छी रहती है। किसी विश्वसनीय नर्सरी से स्वस्थ एवं रोगमुक्त पौधे खरीदें।

खेत की तैयारी

खेत की अच्छी तरह जुताई करके खरपतवार साफ कर दें। इसके बाद 1 मीटर × 1 मीटर × 1 मीटर आकार के गड्ढे खोदें। प्रत्येक गड्ढे में 20–25 किलोग्राम सड़ी हुई गोबर की खाद, नीम खली और ऊपरी मिट्टी मिलाकर भर दें। गड्ढे भरने के बाद 15–20 दिन तक छोड़ दें।

रोपण

बेल के पौधों की रोपाई वर्षा ऋतु (जून–अगस्त) में करना सबसे अच्छा माना जाता है। पौधों के बीच 8–10 मीटर की दूरी रखें। पौधा लगाने के बाद उसके आसपास मिट्टी दबा दें और हल्की सिंचाई करें।

सिंचाई

शुरुआती 2–3 वर्षों तक पौधों को नियमित पानी की आवश्यकता होती है। गर्मियों में 10–15 दिन के अंतराल पर सिंचाई करें। बड़े हो जाने पर बेल के पेड़ कम पानी में भी जीवित रह सकते हैं, लेकिन फल उत्पादन बढ़ाने के लिए समय-समय पर सिंचाई लाभदायक रहती है।

खाद और उर्वरक

हर वर्ष प्रति पौधा 20–30 किलोग्राम गोबर की खाद दें। पौधे की उम्र बढ़ने के साथ खाद की मात्रा बढ़ाई जा सकती है। फल बनने के समय पोटाश युक्त उर्वरकों का प्रयोग करने से फल का आकार और गुणवत्ता बेहतर होती है।

निराई-गुड़ाई और देखभाल

पौधों के आसपास खरपतवार न उगने दें। समय-समय पर निराई-गुड़ाई करते रहें। सूखी और रोगग्रस्त शाखाओं की छंटाई करने से पेड़ स्वस्थ रहता है और उत्पादन बढ़ता है।

रोग और कीट नियंत्रण

बेल में सामान्यतः रोग और कीट कम लगते हैं। फिर भी पत्तियों पर धब्बे, फल मक्खी या अन्य कीट दिखाई दें तो कृषि विशेषज्ञ की सलाह के अनुसार उपचार करें। बाग की सफाई बनाए रखना सबसे प्रभावी रोकथाम उपाय है।

फल तुड़ाई

ग्राफ्टेड पौधे सामान्यतः 4–5 वर्ष में फल देना शुरू कर देते हैं। फल पकने पर उनका रंग हरा-पीला हो जाता है और बाहरी खोल कठोर हो जाता है। सामान्यतः मार्च से जून के बीच तुड़ाई की जाती है।

उत्पादन और कमाई

एक विकसित बेल का पेड़ प्रति वर्ष 200–500 या उससे अधिक फल दे सकता है। बेल के फलों की मांग जूस, शरबत, मुरब्बा और आयुर्वेदिक उत्पादों में रहती है। कम रखरखाव और लंबे समय तक उत्पादन के कारण यह किसानों के लिए एक लाभदायक बागवानी फसल मानी जाती है।

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