मुर्गी पालन प्रशिक्षण कार्यक्रम (5 दिवसीय प्रशिक्षण)
प्रथम दिवस:
प्रशिक्षण के प्रथम दिन प्रतिभागियों को मुर्गी पालन के महत्व, स्वरोजगार एवं उद्यमिता की संभावनाओं तथा पोल्ट्री उद्योग की वर्तमान स्थिति से अवगत कराया जाएगा। विभिन्न नस्लों एवं प्रजातियों की पहचान, ब्रॉयलर एवं लेयर मुर्गी पालन के बीच अंतर, पोल्ट्री फार्म की स्थापना, शेड निर्माण, जैव सुरक्षा (बायो-सिक्योरिटी) तथा स्वच्छता प्रबंधन के बारे में विस्तृत जानकारी प्रदान की जाएगी।
द्वितीय दिवस:
दूसरे दिन मुर्गियों के पोषण एवं आहार प्रबंधन पर प्रशिक्षण दिया जाएगा। प्रतिभागियों को विभिन्न आयु वर्ग के चूजों एवं मुर्गियों के लिए संतुलित आहार, फीड की गुणवत्ता, पोषक तत्वों की आवश्यकता, पानी प्रबंधन तथा फीड लागत कम करते हुए उत्पादन बढ़ाने की तकनीकों का व्यावहारिक ज्ञान कराया जाएगा। साथ ही चारा भंडारण एवं फीड प्रबंधन की वैज्ञानिक विधियां भी सिखाई जाएंगी।
तृतीय दिवस:
तीसरे दिन पोल्ट्री स्वास्थ्य एवं रोग प्रबंधन पर विशेष प्रशिक्षण आयोजित किया जाएगा। इसमें सामान्य रोगों की पहचान, टीकाकरण कार्यक्रम, जैव सुरक्षा उपाय, स्वच्छता प्रबंधन, रोगों की रोकथाम, प्राथमिक उपचार तथा पशु चिकित्सकीय सेवाओं के उपयोग के बारे में जानकारी दी जाएगी। प्रतिभागियों को स्वस्थ एवं उत्पादक पोल्ट्री फार्म बनाए रखने के लिए आवश्यक उपायों का प्रशिक्षण भी प्रदान किया जाएगा।
चतुर्थ दिवस:
चौथे दिन उत्पादन एवं प्रबंधन तकनीकों पर प्रशिक्षण दिया जाएगा। इसमें ब्रॉयलर मुर्गियों में वजन वृद्धि की वैज्ञानिक तकनीकें, लेयर मुर्गियों में अंडा उत्पादन बढ़ाने के उपाय, प्रकाश एवं तापमान प्रबंधन, चूजों की देखभाल, रिकॉर्ड संधारण तथा उत्पादन क्षमता बढ़ाने के आधुनिक तरीकों का व्यावहारिक प्रशिक्षण शामिल होगा।
पंचम दिवस:
प्रशिक्षण के अंतिम दिन पोल्ट्री उद्यमिता एवं व्यवसाय प्रबंधन पर विशेष सत्र आयोजित किया जाएगा। प्रतिभागियों को पोल्ट्री परियोजना तैयार करना, लागत एवं लाभ विश्लेषण, सरकारी योजनाओं एवं ऋण सुविधाओं की जानकारी, अंडों एवं पोल्ट्री उत्पादों का विपणन, मूल्य संवर्धन तथा सफल पोल्ट्री व्यवसाय स्थापित करने के लिए आवश्यक प्रबंधन कौशल सिखाए जाएंगे। प्रशिक्षण के अंत में प्रतिभागियों का मूल्यांकन, प्रश्नोत्तर सत्र एवं प्रमाण-पत्र वितरण किया जाएगा।