संतरे की खेती
मिट्टी की जांच
सबसे पहले खेत की मिट्टी की जांच करवाएं। संतरे के लिए अच्छी जल निकासी वाली दोमट मिट्टी और pH 5.5–7.5 उपयुक्त होती है।
खेत की तैयारी
खेत की गहरी जुताई करें और खरपतवार साफ करें। खेत को समतल बनाएं ताकि पानी जमा न हो।
गड्ढे तैयार करें
60×60×60 सेमी के गड्ढे खोदें। पौधों के बीच लगभग 6 मीटर की दूरी रखें। एक गड्ढे में 15–20 किलो सड़ी गोबर की खाद मिलाकर भरें।
पौधों का चयन
किसी विश्वसनीय नर्सरी से रोगमुक्त और अच्छी गुणवत्ता के कलमी पौधे खरीदें। 1–2 वर्ष पुराने पौधे बेहतर रहते हैं।
रोपाई
मानसून (जुलाई–अगस्त) या सिंचित क्षेत्र में फरवरी–मार्च में पौधे लगाएं। पौधा लगाकर हल्की सिंचाई करें।
सिंचाई
शुरुआत में 7–10 दिन के अंतराल पर पानी दें। बड़े पेड़ों में मौसम के अनुसार 15–20 दिन पर सिंचाई करें। ड्रिप सिंचाई सबसे अच्छी रहती है।
खाद और उर्वरक
हर वर्ष गोबर की खाद दें। साथ में नाइट्रोजन, फॉस्फोरस और पोटाश की संतुलित मात्रा कृषि विशेषज्ञ की सलाह अनुसार दें।
निराई-गुड़ाई
खरपतवार हटाते रहें। पेड़ों के आसपास साफ-सफाई रखें और मल्चिंग करें ताकि नमी बनी रहे।
रोग और कीट नियंत्रण
समय-समय पर पेड़ों का निरीक्षण करें। रोग या कीट दिखने पर कृषि विभाग या कृषि विशेषज्ञ की सलाह से दवा का प्रयोग करें।
फल तुड़ाई
पौधे 3–4 साल में फल देना शुरू करते हैं। फल पूरी तरह पीले/नारंगी होने पर तुड़ाई करें।
1 एकड़ में कितने पौधे?
6×6 मीटर दूरी पर लगभग 110–115 पौधे लग जाते हैं।
कमाई
अच्छी देखभाल होने पर 5–7 साल बाद संतरे का बाग अच्छा उत्पादन देने लगता है और प्रति एकड़ अच्छी आय हो सकती है।
अगर आप बताएं कि आपके पास कितनी जमीन है (कट्ठा, बीघा या एकड़ में) और बिहार के किस जिले में खेती करना चाहते हैं, तो मैं पूरा खर्च, पौधों की संख्या और संभावित कमाई का हिसाब निकाल दूँगा।