सहजन, जिसे मुनगा या ड्रमस्टिक भी कहा जाता है, एक अत्यंत लाभदायक और कम लागत वाली फसल है। इसकी फलियाँ, पत्तियाँ और फूल सभी उपयोगी होते हैं। इसकी मांग सब्जी, आयुर्वेद, पोषण उत्पाद और पशु चारे के रूप में लगातार बढ़ रही है। बिहार की जलवायु सहजन की खेती के लिए काफी उपयुक्त है।
1. जलवायु और मिट्टी
सहजन गर्म जलवायु का पौधा है और 25°C से 35°C तापमान में अच्छी वृद्धि करता है। यह सूखा सहन कर सकता है, लेकिन जलभराव बिल्कुल पसंद नहीं करता। अच्छी जल निकासी वाली दोमट या बलुई दोमट मिट्टी सबसे उपयुक्त रहती है। मिट्टी का pH 6.0 से 8.0 तक अच्छा माना जाता है।
2. उन्नत किस्मों का चयन
व्यावसायिक खेती के लिए उन्नत किस्में लगाना चाहिए। भारत में PKM-1, PKM-2, ODC-3 तथा स्थानीय उन्नत किस्में लोकप्रिय हैं। PKM-1 और PKM-2 जल्दी उत्पादन देने वाली किस्में मानी जाती हैं।
3. खेत की तैयारी
खेत की 2–3 बार जुताई करके मिट्टी को भुरभुरी बना लें। खरपतवार हटा दें। इसके बाद 45 सेमी × 45 सेमी × 45 सेमी आकार के गड्ढे खोदें। प्रत्येक गड्ढे में 10–15 किलोग्राम सड़ी हुई गोबर की खाद मिलाएँ।
4. बुवाई या रोपण
सहजन की खेती बीज और कलम दोनों से की जा सकती है। व्यावसायिक खेती में बीज द्वारा रोपण अधिक प्रचलित है। वर्षा ऋतु (जून–अगस्त) या सिंचाई सुविधा होने पर फरवरी–मार्च में भी रोपण किया जा सकता है।
फलियों के उत्पादन के लिए दूरी: 2.5 × 2.5 मीटर या 3 × 3 मीटर।
पत्ती उत्पादन के लिए सघन रोपण किया जा सकता है।
5. सिंचाई
रोपण के तुरंत बाद हल्की सिंचाई करें। शुरुआती अवस्था में 7–10 दिन के अंतराल पर पानी दें। पौधे स्थापित हो जाने के बाद कम सिंचाई में भी अच्छी वृद्धि करते हैं। बरसात में जलभराव से बचाना जरूरी है।
6. खाद और उर्वरक
प्रति पौधा प्रतिवर्ष 10–20 किलोग्राम गोबर की खाद दें। आवश्यकता अनुसार नाइट्रोजन, फॉस्फोरस और पोटाश का संतुलित उपयोग किया जा सकता है। जैविक खेती में वर्मी कम्पोस्ट और नीम खली अच्छे विकल्प हैं।
7. छंटाई (Pruning)
जब पौधा लगभग 75–100 सेंटीमीटर ऊँचा हो जाए, तब उसकी शीर्ष कली (Top Shoot) काट दें। इससे अधिक शाखाएँ निकलती हैं और फलियों की संख्या बढ़ती है। हर वर्ष फसल के बाद हल्की छंटाई करें।
8. रोग और कीट नियंत्रण
फल छेदक कीट, पत्ती खाने वाले कीट और फफूंद रोग कभी-कभी दिखाई दे सकते हैं। खेत की सफाई रखें और नियमित निरीक्षण करें। रोग या कीट का प्रकोप बढ़ने पर कृषि विशेषज्ञ की सलाह लें।
9. फसल कटाई
बीज से लगाए गए पौधे 6–8 महीने में फल देना शुरू कर सकते हैं।
फलियाँ 45–60 सेंटीमीटर लंबी होने पर तोड़ी जाती हैं।
बाजार की मांग के अनुसार कोमल फलियों की तुड़ाई करें।
उत्पादन और कमाई
सहजन की फसल जल्दी आय देने वाली फसलों में गिनी जाती है।
एक बार रोपण के बाद कई वर्षों तक उत्पादन मिलता है।
फलियों के अलावा पत्तियों और बीजों से भी अतिरिक्त आय प्राप्त की जा सकती है।
ताजी सब्जी, होटल, मंडी और प्रोसेसिंग उद्योग में इसकी अच्छी मांग रहती है।
बिहार के किसानों के लिए सुझाव
बिहार में जून–जुलाई का समय सहजन लगाने के लिए बहुत अच्छा माना जाता है। यदि आपके पास 1 बीघा या 1 एकड़ जमीन है, तो सहजन की खेती से सब्जी फसलों की तुलना में कम लागत पर अच्छा लाभ प्राप्त किया जा सकता है।